उज्जैन/भोपाल: आखिरकार सालों पुराना वह राष्ट्रीय भ्रम दूर हो गया जिसने न जाने कितने स्कूली बच्चों के हिंदी के नंबर कटवाए होंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक और 'स्पेलिंग-सुधारक' फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि उज्जैन की पवित्र नदी अब सरकारी कागजों में 'क्षिप्रा' (Kshipra) नहीं, बल्कि सीधी-सरल 'शिप्रा' (Shipra) कहलाएगी।
मामला तब गरमाया जब नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की हाई-लेवल बैठक में अधिकारी महोदय अपनी चमचमाती डिजिटल प्रेजेंटेशन में 'क्षिप्रा' लिखकर लाए थे। इतिहास और धर्मग्रंथों के ज्ञाता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नजर जैसे ही इस पर पड़ी, उन्होंने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई।
AI का पहला 'स्मार्ट' ज्ञान और मुख्यमंत्री का 'धरातल' टेस्ट
अधिकारियों ने अपनी लाज बचाने के लिए तुरंत आज के जमाने के सबसे बड़े ज्ञानी यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शरण ली। AI ने भी अपनी डेटा-खोपड़ी दौड़ाकर पहली बार में कह दिया-"हुजूर, संस्कृत के हिसाब से 'क्षिप्रा' ही सही है, जिसका मतलब होता है बुलेट ट्रेन की तरह तेज़ बहने वाली नदी।"
अब AI ठहरी अमेरिका की पैदाइश, उसे क्या पता कि उज्जैन की जमीनी हकीकत क्या है! मुख्यमंत्री ने तुरंत AI को जमीन पर लाते हुए कहा कि मानसून के चार दिन छोड़ दिए जाएं, तो हमारी यह पवित्र नदी अपनी मस्तानी और कछुआ गति से बहने के लिए जानी जाती है। जब नदी तेज बहती ही नहीं, तो नाम 'तेज प्रवाह' वाला कैसे हो सकता है?
यजुर्वेद बनाम चैट जीपीटी: जब AI ने जोड़े हाथ!
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आदेश दिया-"इस AI को जरा कालिदास के मेघदूत, रघुवंश और यजुर्वेद का सिलेबस पढ़ाओ और फिर पूछो।" अधिकारियों ने जैसे ही यजुर्वेद और महाकवि कालिदास के संदर्भों का इनपुट डाला, AI के सर्वर शायद चकरा गए। उसने तुरंत अपनी गलती मानते हुए घुटने टेक दिए और कहा-"माफ कीजिएगा सरकार, मुझसे 'ह्यूमन एरर' हो गया था! ग्रंथों के अनुसार यह 'शिप्रा' ही है।" इस तरह, इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने लाइव बैठक में AI को उसकी नानी याद दिला दी।
क्रेन और बजट के साथ 'नमन मिशन'
इस स्पेलिंग सुधार आंदोलन के अलावा, सरकार ने नर्मदा मैया की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी खजाना खोल दिया है।
- 100 करोड़ का 'नमन मिशन': अब नर्मदा परिक्रमा मार्ग से उन सभी लोगों को 'बाय-बाय' कहा जाएगा जिन्होंने वहाँ अतिक्रमण कर रखा था।
- भोजन और विश्राम: बंद पड़ी 'दीनदयाल रसोई' फिर से चालू होगी ताकि श्रद्धालुओं को केवल आस्था के भरोसे न रहना पड़े, पेट पूजा का भी पूरा इंतजाम हो।
- अमरकंटक को तोहफा: इसके साथ ही अमरकंटक में पर्यावरण की रक्षा के लिए एक हाई-टेक जैव विविधता प्रबंधन संस्थान (Biodiversity Institute) भी बनाया जाएगा।
भौकालगुरु का कहना यह है कि, इस बैठक से दो बातें साफ हो गईं- पहली यह कि अगर आपके पास यजुर्वेद और कालिदास का ज्ञान है, तो आप दुनिया के सबसे महंगे AI को भी 'अपडेट' कर सकते हैं। और दूसरी यह कि अब मध्य प्रदेश के टाइपिस्टों को 'क्ष' लिखने की मशक्कत से मुक्ति मिल गई है। मैया शिप्रा की जय!



