दिल्लीवालों, अपनी पुरानी पेट्रोल और सीएनजी गाड़ियों को प्यार से निहार लीजिए और उनके साथ कुछ आखिरी सेल्फी क्लिक कर लीजिए! क्योंकि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट ने दिल्ली को पूरी तरह 'इलेक्ट्रिक' करने का मन बना लिया है।
दिल्ली ने आखिरकार वह फैसला कर लिया है, जिसका इंतजार पर्यावरण, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और बिजली के मीटर, तीनों लंबे समय से कर रहे थे। 1 जुलाई से नई EV पॉलिसी लागू हो रही है। अब सड़कों पर सिर्फ ट्रैफिक ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि चार्जिंग स्टेशन भी मोहल्ले की नई 'चाय की दुकान' बनने की तैयारी में हैं।
सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मिलेगी। यह सुनकर कई लोगों ने पहली बार गाड़ी खरीदने से पहले माइलेज नहीं, बल्कि "चार्जिंग टाइम" गूगल करना शुरू कर दिया है। अब घर में सबसे अहम सवाल होगा- "फोन चार्ज हुआ?" के बाद "गाड़ी चार्ज हुई?"
दिल्ली वालों की भी आदत बड़ी दिलचस्प है। पहले लोग पूछते थे, "कितना माईलेज देती है?" अब सवाल बदलकर होगा-"एक बार चार्ज करने पर कितनी चलती है?" यानी बातचीत वही रहेगी, बस ईंधन बदल जाएगा।
नई नीति में चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क बढ़ाने की भी बात है। इससे उन लोगों को सबसे ज्यादा खुशी होगी जो अभी तक मोबाइल की बैटरी खत्म होने पर परेशान होते थे। अब उन्हें गाड़ी की बैटरी खत्म होने का भी नया अनुभव मिलने वाला है। आखिर जिंदगी में कुछ नया सीखना भी तो जरूरी है!
सबसे दिलचस्प बात यह है कि आने वाले समय में पेट्रोल और CNG वाहनों का दायरा धीरे-धीरे कम होगा। यानी भविष्य में बच्चों की किताबों में शायद एक नया सवाल आए- "बेटा, पेट्रोल पंप किसे कहते हैं?" और जवाब होगा- "जहां पापा कभी लाइन में लगते थे।"
हालांकि यह बदलाव सिर्फ गाड़ियों का नहीं, सोच का भी है। जिस शहर की पहचान कभी धुएं और ट्रैफिक से होती थी, वही शहर अब साफ हवा और हरित परिवहन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। बदलाव रातों-रात नहीं आएगा, लेकिन हर नई शुरुआत एक छोटे कदम से ही होती है।
इसलिए अगर आपके पड़ोसी ने नई इलेक्ट्रिक कार खरीद ली है, तो उनसे यह मत पूछिए कि "कितने की ली?" पहले यह पूछिए-"चार्जर घर पर लगाया या अभी एक्सटेंशन बोर्ड से काम चला रहे हो?"
दिल्ली की नई EV पॉलिसी हमें यही सिखाती है कि भविष्य की रफ्तार सिर्फ तेज नहीं होगी, बल्कि पहले से कहीं ज्यादा शांत, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल भी होगी। अब बस इंतजार उस दिन का है, जब हॉर्न से ज्यादा सड़कों पर पक्षियों की आवाज सुनाई दे।
दिल्ली की नई EV पॉलिसी: अब पेट्रोल पंप वाले भी पूछेंगे- "भाई, कभी मिलने भी आ जाया करो!"
दिल्ली की नई EV पॉलिसी पर पढ़िए एक सकारात्मक और मजेदार व्यंग्य। जानिए कैसे पेट्रोल से इलेक्ट्रिक सफर की ओर बढ़ता शहर बदलती सोच और हरित भविष्य की नई कहानी लिख रहा है।



