भारतीय रेल में सफर करने वालों की रचनात्मकता का कोई जवाब नहीं। कोई खिड़की से बाहर का नज़ारा यादगार बनाता है, तो कुछ लोग पूरी कोशिश करते हैं कि ट्रेन का थोड़ा-बहुत सामान ही यादगार बन जाए।
RTI में खुलासा हुआ कि पिछले चार वर्षों में एसी कोचों से करोड़ों बेडशीट, तौलिये, कंबल और तकिए गायब हो गए। अब समझ में आया कि भारतीय यात्रियों का लगाव रेलवे से कितना गहरा है। कुछ लोग तो शायद सोचते होंगे कि टिकट में "यादें" शामिल हैं, इसलिए एक तौलिया और बेडशीट भी साथ ले जाना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।
सबसे ज्यादा चोरी तौलियों की हुई। वजह भी साफ है। बेडशीट तो पड़ोसी पूछ लेगा कि "भाई, ये रेलवे वाली लग रही है!" लेकिन तौलिया बड़ी आसानी से घर के बाथरूम में घुलमिल जाता है। कौन पहचान पाएगा कि यह रेलवे की मेहमाननवाजी का हिस्सा था या आपकी खरीदारी का कमाल!
रेलवे भी कम दिलचस्प नहीं है। हर साल नए बेडरोल खरीदता है और कुछ यात्री हर साल अपने घर का लिनेन स्टॉक अपडेट कर लेते हैं। अगर यही रफ्तार रही तो भविष्य में रेलवे को शायद टिकट पर एक नया विकल्प जोड़ना पड़े-"सफर के बाद बेडशीट वापस करेंगे?" हाँ या नहीं!
हालांकि, मजाक अपनी जगह है, लेकिन यह नुकसान आखिरकार आम जनता की जेब पर ही पड़ता है। रेलवे को नए बेडरोल खरीदने पर करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जो सार्वजनिक धन है। अगर यात्री अपनी जिम्मेदारी निभाएं और रेलवे की संपत्ति को अपनी संपत्ति समझकर उसकी रक्षा करें, तो यह पैसा नई ट्रेनों, बेहतर सुविधाओं और यात्रियों की सेवा पर खर्च किया जा सकता है।
इसलिए अगली बार ट्रेन से उतरते समय अपना बैग जरूर जांचिए... कहीं उसमें आपकी यादों के साथ रेलवे का तौलिया भी तो सफर पर नहीं निकल पड़ा!



