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CBSE ने AI की पढ़ाई मुफ्त की, अब बच्चों का भविष्य होगा और भी स्मार्ट!

CBSE की AI पहल बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा कदम है। मुफ्त ऑनलाइन AI और डेटा साइंस कोर्स पर हल्के-फुल्के अंदाज में पढ़िए यह मजेदार व्यंग्य।

CBSE ने AI की पढ़ाई मुफ्त की, अब बच्चों का भविष्य होगा और भी स्मार्ट!

हेडिंग पढ़कर चौंकिए मत! हमारे जमाने में कक्षा 8 से 12वीं तक के बच्चों का सबसे बड़ा तकनीकी अचीवमेंट होता था कंप्यूटर लैब में जाकर चुपके से वीडियो गेम खेल लेना या फिर पेंट ब्रश में टेढ़ा-मेढ़ा पहाड़ और उगता हुआ सूरज बना देना। कंप्यूटर पीरियड का मतलब पढ़ाई कम और मस्ती ज्यादा होता था। लेकिन धन्य हो CBSE और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, जिन्होंने अब बच्चों को सीधे भविष्य की तकनीक का खिलाड़ी बनने का मौका दे दिया है।
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अब जमाना बदल गया है। पहले बच्चे घर में कहते थे, "मम्मी, आज कंप्यूटर पीरियड था।" अब कहेंगे, "मम्मी, आज AI मॉडल ट्रेन किया है।" सुनने में भले ही भारी लगे, लेकिन आने वाले समय में यही सबसे बड़ा भौकाल होगा।

जी हां, अब CBSE से जुड़े स्कूलों के कक्षा 8 से 12 तक के छात्र NIELIT डिजिटल यूनिवर्सिटी के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, पायथन, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे आधुनिक विषयों के मुफ्त ऑनलाइन कोर्स कर सकेंगे। यानी भविष्य की तैयारी अब बिना फीस के होगी।

ज्ञान की ऐसी बारिश... जहां फीस नहीं, सिर्फ सीखने का मौका

आजकल मुफ्त में कुछ मिले तो पहले शक होता है। लेकिन इस बार मामला असली है। न कोचिंग की मोटी फीस, न एडमिशन की लंबी लाइन। बस इंटरनेट और सीखने का जज्बा चाहिए।

पहले बच्चे पायथन सुनते ही अजगर खोजते थे, अब उसी Python में कोड लिखेंगे। कल तक जो मोबाइल पर गेम खेल रहे थे, कल वही AI से ऐप भी बना सकते हैं।"

'सेल्फ-पेस्ड'... यानी गुरुजी भी नहीं पूछेंगे, होमवर्क हुआ कि नहीं

इस पहल की सबसे शानदार बात है कि कोर्स Self-Paced हैं। मतलब जब समय मिले, तब पढ़ो। सुबह पढ़ो, शाम को पढ़ो या छुट्टी वाले दिन पढ़ो। कोई घंटी नहीं बजेगी और कोई टीचर यह नहीं पूछेगा कि "AI का असाइनमेंट पूरा क्यों नहीं हुआ?"

अब मोबाइल देखकर डांटना थोड़ा कम कर दीजिए

पहले घर में सबसे ज्यादा बोला जाने वाला वाक्य था-"दिनभर मोबाइल में घुसा रहता है, कुछ पढ़ाई भी कर लिया कर।"

अब जमाना बदल गया है।

अब बच्चा कहेगा-"माताजी, कृपया व्यवधान न डालें... मैं AI सीखकर भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में योगदान देने की तैयारी कर रहा हूं।"

और अगर यह सुनकर भी डांट पड़े, तो समझ लीजिए AI अभी घर तक नहीं पहुंचा है।

मजाक अपनी जगह... लेकिन फैसला बिल्कुल सही

भौकालगुरु मानते हैं कि इस बार CBSE ने ऐसा काम किया है, जिसकी जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है। आज AI, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसी तकनीकें आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत बनने जा रही हैं। ऐसे में अगर बच्चे स्कूल के दिनों से ही इनकी समझ विकसित कर लें, तो वे सिर्फ नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नई तकनीक बनाने वाले बन सकते हैं।

सरकारी हो या प्राइवेट स्कूल, हर छात्र के लिए यह एक शानदार मौका है। जिस ज्ञान के लिए बड़े शहरों में हजारों-लाखों रुपये खर्च होते हैं, वही अब मुफ्त में उपलब्ध है।

तो बच्चों... भौकालगुरु की एक ही सलाह है:

"रील्स तो कभी भी देख लोगे... पहले AI सीख लो। आने वाले समय में भौकाल उसी का होगा, जिसके पास स्क्रॉलिंग नहीं, स्किल होगी!"