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मुन्नाभाई MBBS के बाद अब बिहार के 'फर्जी मास्टर साहब': बिना कॉलेज गए बांट रहे थे ज्ञान!

बिना कॉलेज गए छप गई डिग्री और सालों उठाई असली सैलरी। अब विजिलेंस के डंडे से 'फर्जी गुरुजी' हैरान; नौकरी तो गई ही, अब सरकार वसूल करेगी पाई-पाई वो भी 'सूद' समेत!

मुन्नाभाई MBBS के बाद अब बिहार के 'फर्जी मास्टर साहब': बिना कॉलेज गए बांट रहे थे ज्ञान!

बिहार की पावन धरती, जिसने दुनिया को नालंदा और चाणक्य दिए, वहां पिछले कुछ सालों से ज्ञान का एक बिल्कुल नया और अनूठा 'शॉर्टकट मॉडल' चल रहा था। इस मॉडल के तहत आपको शिक्षक बनने के लिए सालों तक पढ़ाई करने, आंखें फोड़ने या कोई कठिन परीक्षा पास करने की कतई जरूरत नहीं थी। बस एक अदद शानदार प्रिंटर, थोड़ा सा फोटोशॉप का ज्ञान और एक 'काल्पनिक' यूनिवर्सिटी का नाम ही काफी था। लेकिन अफसोस! बिहार सरकार के विजीलैंस ब्यूरो ने इस 'क्रिएटिव' शिक्षा पद्धति पर अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल और लीगल स्ट्राइक कर दी है।

बिना पढ़े 'मास्टर साहब' बनने का अद्भुत चमत्कार

दाद देनी पड़ेगी हमारे इन 3,035 'कलाकारों' की, जिन्होंने बिना किसी कॉलेज गए, बिना कोई लेक्चर सुने, घर बैठे-बैठे ही डिग्री और गोल्ड मेडल दोनों हासिल कर लिए। इस महा-फर्जीवाड़े की खूबसूरती देखिए-कई मामलों में तो जिन कॉलेजों की डिग्रियां लगाकर लोग सालों से ककहरा सिखा रहे थे, वे कॉलेज इस ब्रह्मांड के नक्शे पर मौजूद ही नहीं थे! वो सिर्फ फाइलों और हमारे गुरुजी के सुनहरे सपनों में चल रहे थे। कुछ शातिर दिमागों ने तो असली यूनिवर्सिटीज के नाम पर ऐसी 'हूबहू' मार्कशीट छापी कि खुद यूनिवर्सिटी के चांसलर भी देखकर चकरा जाएं कि 'अरे, यह कोर्स हमारे यहाँ कब शुरू हुआ?'

सरकारी तिजोरी का स्वाद और 'सूद' का कड़वा घूंट

साल 2006 से 2015 के बीच सरकारी सिस्टम की आंखों पर जो पट्टी बंधी थी, उसका इन फर्जी गुरुजी लोगों ने जमकर फायदा उठाया। महीने की एक तारीख को जब मोबाइल पर 'सैलरी क्रेडिटेड' का मैसेज आता होगा, तो दिल कितना बाग-बाग होता होगा! पर कहते हैं न कि सरकारी माल मुफ्त का जरूर होता है, पर हजम आसानी से नहीं होता। अब शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जितने साल मुफ्त की रोटियां तोड़ी हैं, अब उसकी एक-एक पाई 'ब्याज' (सूद) समेत लौटानी होगी। यह तो वही बात हो गई कि 'खाया-पिया कुछ नहीं, और गिलास तोड़ा बारह आना'—यहाँ तो खैर सालों तक खाया-पिया और अब ब्याज भी देना पड़ेगा।

1,830 एफआईआर और रसूखदारों की 'नॉन-स्टॉप' पैरवी

जब मामला 3,035 गुरुजी लोगों का हो, तो चाचा, ताऊ और फूफा जैसे रसूखदारों के फोन घनघनाने लाजमी हैं। थानों में 1,830 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, और पैरवी करने वाले कह रहे हैं—"साहब, थोड़ा देख लीजिए, गलती से प्रिंटर ने गलत डिग्री छाप दी थी।" लेकिन इस बार शिक्षा विभाग के तेवर बिल्कुल 'कड़क चाय' जैसे हैं। अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि पैरवी का चश्मा उतारकर सीधे जेल का रास्ता देखिए। अब कोई चालाकी काम नहीं आने वाली।

इस्तीफों की 'बाढ़' पर सरकार का 'एस्केप रूट' ब्लॉक

विजीलैंस का डंडा चलते ही स्कूलों में अचानक इस्तीफों की बाढ़ आ गई है। जो गुरुजी कल तक क्लास में आने से कतराते थे, वे अब सबसे पहले अपना इस्तीफा सौंपने दौड़ रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि 'इस्तीफा दे दो, मामला रफा-दफा।' लेकिन सरकार भी इस बार पूरे मूड में है। विभाग ने मुस्कुराते हुए कह दिया है-"हुजूर, इस्तीफा तो आपकी चालाकी का एक छोटा सा हिस्सा है, हमारा क्रिमिनल केस और रिकवरी का मीटर तो आपके घर का दरवाजा खटखटाकर ही मानेगा।"

भौकालगुरु राहत की सांस लेते हुये कहते हैं, इस पूरे घटनाक्रम से उन योग्य और मेधावी युवाओं को थोड़ी राहत जरूर मिली होगी, जो सालों से डिग्री हाथ में लेकर कतार में खड़े थे और उनकी जगह कोई 'कागजी शेर' कुर्सी पर बैठा था। अब देखना यह है कि जब इन फर्जी गुरुजी लोगों से ब्याज समेत वसूली होगी, तो वे गणित का कौन सा नया फॉर्मूला लगाकर सरकार को समझाते हैं!