कई वर्षों से भारतीय नागरिक एक सुखद भ्रम में जी रहे थे कि जेब में रखा नीला पासपोर्ट उनकी नागरिकता का सबसे बड़ा और अंतिम प्रमाण है। लेकिन अब विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह साफ करके सारा सस्पेंस खत्म कर दिया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से सिर्फ एक 'यात्रा दस्तावेज' (Travel Document) है। यानी जिसे जनता जनार्दन अब तक नागरिकता का 'ब्रह्मास्त्र' समझ रही थी, वह दरअसल विदेश घूमने का एक सरकारी टिकट निकला।
यह खबर सुनकर यकीनन उन लोगों को सबसे बड़ा झटका लगा होगा, जिन्होंने पासपोर्ट हाथ में आते ही खुद को आधा एनआरआई (NRI) और पूरा वैश्विक नागरिक घोषित कर दिया था। वहीं दूसरी तरफ, हमारे आम भारतीय भाई-बहनों ने राहत की सांस ली है। उन्हें लगा कि चलो अच्छा है, जो नागरिकता अब तक एक सरकारी नीली किताब में कैद समझी जा रही थी, वह अभी भी उनकी रोजमर्रा की आदतों में पूरी तरह सुरक्षित है।
आखिर असली भारतीय होने का 'प्रमाण' क्या है?
सच कहूं तो असली भारतीय होने का सबूत कोई पासपोर्ट या प्लास्टिक का कार्ड दे ही नहीं सकता। इसके असली और अकाट्य प्रत्यक्ष प्रमाण तो कुछ और ही हैं:
- बेलन नीति: जब आप टूथपेस्ट को आखिरी बूंद तक बेलन से निचोड़कर इस्तेमाल करते हैं।
- मैनुअल सेफ्टी: जब मिक्सी का ढक्कन बिना हाथ से दबाए मिक्सर चालू करने का रिस्क नहीं लेते।
- इकॉनॉमिक्स: जब कबाड़ी वाले से पांच रुपये कम कराने के लिए बीस मिनट तक देश की अर्थव्यवस्था पर बहस करते हैं।
- जुगाड़ शास्त्र: और जब हर सरकारी दफ्तर में पहुंचते ही पहला सवाल पूछते हैं—"सर, कोई दूसरा तरीका (जुगाड़) नहीं है क्या?"
कागज का टुकड़ा नहीं, भारतीयता एक 'फीलिंग' है!
अब कुछ लोग गंभीर होकर पूछ रहे हैं कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित कैसे होगी? भाई साहब, हमारी भारतीयता कोई इतनी सस्ती चीज थोड़ी है जो कागज के एक अदने से टुकड़े में समा जाए।
"भारतीयता तो वह अटूट आत्मविश्वास है, जिसमें किसी अपरिचित की शादी में भी 'लड़के वाले' बनकर पनीर टिक्का उड़ाने का हौसला हो। यह ट्रेन की सीट पर खुद बैठकर आधा सामान फैलाने का जन्मसिद्ध अधिकार है, और टीवी के सामने बैठकर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान को मुफ्त सलाह देने का राष्ट्रीय कर्तव्य है।"
वीआईपी क्लब वालों को 'स्पीड ब्रेकर'
वैसे सरकार का यह संदेश उन लोगों के लिए एक बेहतरीन 'स्पीड ब्रेकर' है, जो सोचते थे कि पासपोर्ट बनते ही वे सीधे किसी वीआईपी क्लब के परमानेंट मेंबर बन गए हैं। कानून ने मुस्कुराते हुए साफ कर दिया है कि बेटा, पासपोर्ट तुम्हें विदेश की यात्रा तो करा सकता है, लेकिन तुम्हारी नागरिकता का फैसला देश का कानून और तुम्हारी जड़ें ही करेंगी।
चलते-चलते भौकालगुरु की सलाह: इसलिए अपने पासपोर्ट को अलमारी में सुरक्षित रखिए, वह विदेश यात्रा में बहुत काम आएगा। लेकिन अपनी नागरिकता की बिल्कुल चिंता मत कीजिए। जब तक आप ट्रैफिक जाम में खड़े होकर आगे वाले ड्राइवर को गाड़ी चलाने की विशेषज्ञ सलाह देते रहेंगे, सब्जी वाले से 'मुफ्त का धनिया-मिर्ची' मांगते रहेंगे और हर मुद्दे पर बिना मांगे अपनी राय देते रहेंगे... तब तक इस देश में आपकी नागरिकता पर कोई माई का लाल सवाल नहीं उठा सकता!



