एक दौर था जब विदेश से लौटने वाले लोग अक्सर ठंडी सांस भरकर कहते थे, "वहां के एयरपोर्ट्स देखकर लगता है कि हम अभी कितने पीछे हैं।" लेकिन आज वक्त का पहिया घूम चुका है। अब दुनिया भारत की तरफ देखकर कह रही है—"अगर मौका मिले, तो हमारा एयरपोर्ट भी किसी भारतीय कंपनी से ही बनवा दीजिए।"
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार का यह हालिया बयान कि "उम्मीद है जल्द ही भारतीय कंपनियां इजरायल में भी एयरपोर्ट बनाएंगी," महज कोई औपचारिक तारीफ नहीं है। यह असल में भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत और उसकी इंजीनियरिंग क्षमता पर बढ़ते वैश्विक भरोसे की एक शानदार झलक है। दिलचस्प बात यह है कि यह टिप्पणी ठीक उस समय आई है, जब हमारे गुवाहाटी और नवी मुंबई के एयरपोर्ट्स को दुनिया के सबसे खूबसूरत हवाई अड्डों की फेहरिस्त में शामिल किया गया है।
कभी हम दुनिया के चमचमाते एयरपोर्ट्स को देखकर खुद को बेहतर बनाने की प्रेरणा लेते थे, लेकिन आज दुनिया हमारे नायाब डिजाइन, बेजोड़ इंजीनियरिंग और बेमिसाल निर्माण क्षमता की कायल हो रही है। ऐसा लगता है कि अब एयरपोर्ट्स से सिर्फ उड़ानें ही नहीं उड़ रहीं, बल्कि 'बोर्डिंग पास' के साथ-साथ भारत की आधुनिकता का अनुभव भी पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट होने लगा है।
हल्की-फुल्की चुटकियों और व्यंग्य से इतर, यह बदलाव हमारी तकनीकी ताकत, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक पटल पर भारत की एक नई व मजबूत पहचान का सबसे बड़ा सबूत है। अगर देश के विकास और निर्माण की यही रफ्तार बनी रही, तो वो दिन दूर नहीं जब भारतीय कंपनियां सिर्फ भारत के आसमान को ही नहीं संवारेंगी, बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों के सपनों को भी जमीनी आकार देती नजर आएंगी।



