कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने विधानसभा में अपना पहला पूर्ण बजट क्या पेश किया, ऐसा लगा मानो वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता साक्षात 'सांता क्लॉज़' का रूप धरकर आए हों। आमतौर पर बजट का मतलब होता है-टैक्स का बढ़ना और जेब का हल्का होना। लेकिन इस बार सरकार ने जनता से कहा, "आप बस सपने देखिए, उन्हें पूरा करने का इंतजाम हम करेंगे!"
सबसे बड़ा ऐलान-एक लाख सरकारी नौकरियां। इनमें 20 हजार पुलिस और 50 हजार शिक्षकों के पद शामिल हैं। यानी अब बंगाल के युवा चाय की दुकान पर सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि अपनी जॉइनिंग डेट पर भी बहस करेंगे। महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण ने इस घोषणा में ऐसा तड़का लगाया है कि अब सरकारी दफ्तरों से लेकर पुलिस थानों तक 'नारी शक्ति' की दस्तक और मजबूत होगी।
महिलाओं के लिए तो बजट किसी उत्सव से कम नहीं है। मुफ्त बस यात्रा के लिए 550 करोड़ रुपये, अन्नपूर्णा योजना के लिए 36 हजार करोड़ रुपये और अविवाहित महिलाओं की उच्च शिक्षा के लिए 50 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता। मतलब साफ है-सरकार चाहती है कि महिलाएं आगे बढ़ें, और अगर रास्ते में बस पकड़नी पड़े तो उसका किराया भी सरकार ही देगी!
पत्रकारों के लिए 5 हजार रुपये मासिक पेंशन की घोषणा ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के चेहरों पर भी मुस्कान ला दी है। अब वरिष्ठ पत्रकार पुरानी राजनीतिक कहानियां सुनाते हुए यह भी कह सकेंगे कि "देखो भाई, खबरों ने आखिर बुढ़ापे का सहारा दे ही दिया।"
राजनीतिक कारणों से जेल जा चुके लोगों के लिए 10 हजार रुपये मासिक सहायता और युवाओं के लिए 'भरोसा योजना' भी कम दिलचस्प नहीं है। बेरोजगार स्नातकों को 3 हजार और गैर-स्नातकों को 2 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी सरकार कह रही है-"नौकरी की तैयारी करते रहिए, भरोसा हमारा है!"
उधर, महंगाई भत्ते (DA) में 20 फीसदी बढ़ोतरी ने सरकारी कर्मचारियों के चेहरे ऐसे खिला दिए हैं जैसे दुर्गा पूजा की छुट्टियों की घोषणा हो गई हो। अब 1 अक्टूबर 2026 का इंतजार बड़ी बेसब्री से होगा।
नए हवाई अड्डे, उद्योग और बुनियादी ढांचे की योजनाएं बताती हैं कि सरकार सिर्फ आज नहीं, आने वाले कल की भी तैयारी कर रही है।
भौकालगुरु कह रहे हैं- बंगाल का यह बजट देखकर लगता है कि सरकार ने एक्सेल शीट कम और उम्मीदों की डायरी ज्यादा खोली थी। अब जनता भी कह रही है-'वाह रे बजट! तूने तो वादों को सीधे कैशबैक में बदल दिया!'



