बिहार में शराबबंदी एक ऐसा पावन और अचूक व्रत है, जिसे तोड़ने के लिए केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि अब ट्रेन के 'AC फर्स्ट क्लास' के कूपे भी खुद को समर्पित कर चुके हैं। समस्तीपुर स्टेशन पर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से 75 लीटर चमचमाती विदेशी शराब के साथ पकड़ी गईं 25 वर्षीया नेहा झा ने यह साबित कर दिया है कि जब इरादे बुलंद हों और पारिवारिक परंपराओं का आशीर्वाद साथ हो, तो सूटकेस में सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि पूरा 'बार' आ सकता है।
अब इसे किस्मत का फेर कहें या 'पारिवारिक स्टार्टअप' का अगला चरण। पिताजी पहले ही इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं देकर जेल की यात्रा कर चुके हैं, और बड़ी बहन निशु झा ने भी नवंबर 2025 में 21 लीटर शराब के साथ गिरफ्तार होकर पारिवारिक बिज़नेस की नींव मजबूत की थी। नेहा ने बस उस विरासत को एक नया मुकाम दिया—21 लीटर के मामूली आंकड़े को सीधे 75 लीटर पर पहुँचाया और पैसेंजर क्लास के बजाय सीधे स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के H-1 कोच का दरवाजा अंदर से बंद किया। आखिरकार, पारिवारिक गौरव भी कोई चीज़ होती है!
लेकिन सबसे दिल छू लेने वाली बात तो इस 'स्टार्टअप' का 'बिजनेस मॉडल' है—सफर AC फर्स्ट क्लास का, कूपे रिश्तेदार के नाम पर, और खुद बिना टिकट! इसे कहते हैं न्यूनतम निवेश में अधिकतम जोखिम का प्रदर्शन। जब जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने कूपे का दरवाजा खुलवाया, तो अंदर का नजारा किसी लक्जरी लाउंज से कम नहीं रहा होगा। दो सूटकेस खुले और उनसे ब्रांडेड बोतलों की जो सुगंध महकी, उसने समस्तीपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म को एक पल के लिए फाइव-स्टार होटल के बार में तब्दील कर दिया।
इधर पुलिस और जीआरपी अब बड़े शोध में जुट गई है। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह 75 लीटर की खेप किसके लिए लाई जा रही थी। जैसे कि बिहार में शराबबंदी के बाद लोग केवल गंगाजल पीने लगे हों और यह शराब किसी दुर्लभ म्यूजियम की नुमाइश के लिए जा रही हो!
सच तो यह है कि बिहार की 'सूखी' धरती पर प्यास मिटाने के लिए जब पूरी फैमिली बिज़नेस मॉडल की तरह काम करने लगे, तो समझ जाना चाहिए कि राज्य में कानून का डर भले न पहुंचे, पर 'होम डिलीवरी' का नेटवर्क बहुत मजबूत हो चुका है। फिलहाल नेहा जी जेल में अपनी बहन और पिता के साथ पारिवारिक री-यूनियन का आनंद लेंगी, और पुलिस इस गहन खोज में लगी रहेगी कि आखिर 'सूखे बिहार' में इतनी नदियां कहाँ से बह रही हैं!



