यदि आपको लगता है कि दुनिया में केवल रोल्स-रॉयस, बुगाटी या फेरारी जैसी कारें ही करोड़ों की कीमत रखती हैं, तो शायद आपने अभी तक गुरुग्राम के ट्रैफिक सिस्टम का चमत्कार नहीं देखा। यहाँ एक साधारण-सा करीब 50 हजार रुपये का स्कूटर, देखते ही देखते 10 लाख रुपये का 'सुपर-लक्जरी मॉडल' बन गया।
कहानी की शुरुआत हुई राजीव चौक से, जहाँ ट्रैफिक पुलिस दस्तावेजों की नियमित जांच कर रही थी। तभी एक 'सड़क सम्राट' बिना हेलमेट, बिना बीमा, बिना पीयूसी और पूरे आत्मविश्वास के साथ रॉन्ग साइड से प्रकट हुए। ऐसा लग रहा था मानो ट्रैफिक नियम उनके लिए नहीं, बाकी दुनिया के लिए बनाए गए हों।
पुलिस ने प्यार से लाइसेंस और आरसी मांगी। चालक ने भी पूरे भोलेपन से अपनी जेबें टटोलनी शुरू कर दीं, मानो दस्तावेज जैसी मामूली चीजें उनके स्टेटस से मेल ही नहीं खातीं।
फिर पुलिस ने ऑनलाइन सिस्टम में स्कूटर का नंबर डाला। कहते हैं, सर्वर भी कुछ पल के लिए सोच में पड़ गया। स्क्रीन पर एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 96 चालान चमक रहे थे और बकाया जुर्माना लगभग 10 लाख रुपये तक पहुंच चुका था।
सबसे दुखद बात यह रही कि चालक 'चालानों का शतक' लगाने से महज चार कदम दूर रह गया। अगर पुलिस कुछ दिन और इंतजार कर लेती, तो शायद गुरुग्राम ट्रैफिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड दर्ज हो जाता।
रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि भाई साहब ने ट्रैफिक नियमों के लगभग हर अध्याय को व्यवहारिक रूप से नकार दिया था। बिना हेलमेट चलना उनका मौलिक अधिकार था, पीयूसी उनके लिए महज कागज का टुकड़ा था और रॉन्ग साइड ही उनकी 'राइट साइड' थी।
सबसे दिलचस्प तथ्य यह निकला कि 96 में से 95 चालान हाई-टेक ई-चालान कैमरों ने काटे थे। यानी शहर भर में लगाए गए करोड़ों रुपये के कैमरों का सबसे बड़ा और सबसे नियमित ग्राहक यही चालक निकला। कैमरा जहां दिखता, वहां नियम तोड़कर फोटो खिंचवाना शायद उनकी पुरानी आदत बन चुकी थी।
सोशल मीडिया पर लोग अब मजाक में कह रहे हैं कि जब पुलिस ने स्कूटर जब्त किया होगा, तो मालिक ने जरूर कहा होगा—"साहब, 50 हजार के स्कूटर पर 10 लाख का जुर्माना कौन भरता है? आप स्कूटर ही रख लीजिए, इससे सस्ता तो नया स्कूटर खरीद लूंगा!"
फिलहाल गुरुग्राम पुलिस ने इस 'लक्जरी स्कूटर' को क्रेन पर लादकर इंपाउंड यार्ड पहुंचा दिया है, जहां वह अपनी '10 लाख रुपये वाली शाही पहचान' के साथ आराम कर रहा है। पुलिस ने नागरिकों से एक बार फिर अपील की है कि ट्रैफिक नियमों का पालन करें और लंबित चालानों का समय पर भुगतान करें।
अब असली सवाल यह है कि अगर इस 'गोल्डन स्कूटर' की नीलामी कर दी जाए, तो क्या उससे गुरुग्राम की कुछ सड़कें सुधर जाएंगी? जवाब चाहे जो हो, लेकिन इतना तय है कि इस चालक ने यह साबित कर दिया कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कभी-कभी स्कूटर की कीमत से बीस गुना महंगी पड़ सकती है।
(यह लेख केवल हास्य-व्यंग्य के उद्देश्य से लिखा गया है। ट्रैफिक नियमों का पालन करें, सुरक्षित रहें।)



