आजकल इंस्टाग्राम पर सब कुछ बड़ी आसानी से मिल जाता है। कोई सुबह दुबई में चाय की चुस्कियां लेता दिखता है, तो दोपहर में लंदन की किसी सड़क पर टहलता नजर आता है, और शाम ढलते-ढलते आपको रातों-रात करोड़पति बनने के नायाब गुर भी सिखा देता है। इस आभासी चकाचौंध के बीच असली जिंदगी कैसी होती है, यह जानने-समझने की फुर्सत भला अब किसके पास है!
एक ऐसा ही दिलचस्प मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है, जहां एक युवक ने सोशल मीडिया पर अपनी एक ऐसी जादुई दुनिया खड़ी कर दी कि देखने वाले उसे किसी राजघराने का शहजादा समझ बैठे। आलीशान कोठियों के सामने खिंचवाई गई तस्वीरें, हर फोटो में एक नया स्टाइलिश अंदाज और रईसी की ऐसी झलक कि इंस्टाग्राम की जनता ने बिना सोचे-समझे यह मान लिया कि भाई साहब की जिंदगी तो किसी फिल्मी कहानी जैसी है। लेकिन सोशल मीडिया का एक पुराना और कड़वा नियम है, जो चीज जितनी ज्यादा चमकती है, उसकी हकीकत की उतनी ही बारीकी से जांच कर लेनी चाहिए। बाद में जब इस रईसी का पर्दाफाश हुआ तो पता चला कि जिन चमचमाते बंगलों के सामने खड़े होकर तस्वीरें खिंचवाई जा रही थीं, वे उनके अपने नहीं थे। वह युवक असल में वहां काम करने जाता था, और तस्वीरें इस शातिर अंदाज में लेता था मानो पूरी की पूरी जायदाद उसी के नाम हो।
अब इस पूरे वाकये में उस युवक की गलती ज्यादा थी या फिर हमारी आज की इस बनावटी दुनिया की, जहां लोग दिल और बैंक बैलेंस देखने से पहले इंसान की प्रोफाइल फोटो चेक करते हैं, यह वाकई एक बड़ा बहस का विषय है। असल में, इंस्टाग्राम ने हमें यह 'हुनर' बखूबी सिखा दिया है कि कैसे किराए की कार को अपनी बताया जा सकता है, किसी फाइव-स्टार होटल की लॉबी को अपने घर का ड्रॉइंग रूम साबित किया जा सकता है, और किसी दूसरे के बंगले के सामने पोज देकर खुद को बड़ा उद्योगपति घोषित किया जा सकता है।
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा और तीखा व्यंग्य यही है कि आज के दौर में लोग रिश्ते जोड़ने से पहले इंसान का स्वभाव, उसकी नीयत या सीरत नहीं देखते; बल्कि उसके फॉलोअर्स, उसकी वायरल रील्स और बैकग्राउंड में दिख रही लग्जरी कार की कीमत आंकते हैं। सच तो यह है कि सोशल मीडिया ने हमें झूठ बोलना नहीं सिखाया, बल्कि उसने हमारे झूठ को एक हाई-डेफिनिशन कैमरा और कुछ खूबसूरत फिल्टर्स की चमक दे दी है। इसलिए अगली बार जब कोई इंस्टाग्राम पर खुद को नवाब या शहजादा बताए, तो उसकी पोस्ट में दिखने वाले आलीशान बंगले से ज्यादा उसके सच को टटोलने की कोशिश कीजिएगा; क्योंकि आज के दौर में स्क्रीन पर दिखने वाले महल असली कम और महज एक अच्छा 'बैकग्राउंड' ज्यादा होते हैं।
