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अब चाय की चुस्की के साथ युवाओं से होगा ‘सीधा संवाद’!

पीएम मोदी ने अधिकारियों से विभागीय साइलो तोड़ने, युवाओं से संवाद बढ़ाने और AI के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया। अब नौकरशाही में ‘अपडेट’ होने की तैयारी!

अब चाय की चुस्की के साथ युवाओं से होगा ‘सीधा संवाद’!

राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में अचानक हलचल बढ़ गई है। वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शीर्ष अधिकारियों को दिया गया निर्देश-विभागों के बीच बने ‘साइलो’ यानी काम करने के अलग-अलग खांचों को तोड़िए, युवाओं और विश्वविद्यालयों से संवाद बढ़ाइए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बेहतर इस्तेमाल कीजिए।

निर्देश मिलते ही माना जा रहा है कि कई वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्षों पुरानी फाइलों से धूल हटाने के साथ यह भी पता लगाना शुरू कर दिया होगा कि “आजकल का युवा आखिर सोचता क्या है?”

साइलो तोड़ो, लेकिन फाइल सुरक्षित रहे!

प्रधानमंत्री ने विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। अब असली चुनौती यह है कि वर्षों से अपनी-अपनी सीमाओं में काम कर रहे विभाग एक-दूसरे से कितना खुलकर संवाद करते हैं।

एक काल्पनिक वरिष्ठ अधिकारी ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा, “दीवारें तो गिरा देंगे साहब, लेकिन अगर दो मंत्रालय एक ही कमरे में बैठ गए तो समोसे का बिल कौन पास करेगा?”

यानी साइलो टूटने से पहले शायद सरकारी व्यवस्था को यह तय करना पड़ेगा कि फाइल किस टेबल की नागरिक है।

युवाओं से संवाद: अब रील से बनेगी नीति?

नीति निर्माण में युवाओं और विश्वविद्यालयों को जोड़ने की बात सुनते ही नौकरशाही में एक नया सवाल पैदा हो गया - युवा आखिर कहां मिलेंगे?

एक काल्पनिक 58 वर्षीय सचिव ने अपने पीए से कहा, “जल्दी से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाइए। सुना है आजकल युवा रील्स पर काफी सक्रिय हैं। कहीं अगली नीति पर 15 सेकंड की रील न बनानी पड़े!”

दूसरी तरफ, विश्वविद्यालयों के छात्र शायद यह सोच रहे होंगे कि अधिकारी कैंपस आए तो उनसे अटेंडेंस पूछेंगे या रोजगार, शिक्षा और भविष्य पर चर्चा करेंगे।

AI आएगा, लेकिन ‘मानवीय टच’ भी रहेगा!

AI के जिम्मेदार इस्तेमाल और मानवीय भूमिका बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। अब सरकारी दफ्तरों में इसका सबसे बड़ा प्रयोग यही हो सकता है कि AI एक सेकंड में फाइल का सारांश तैयार कर दे और इंसान यह तय करे कि “इसे अभी आगे भेजना है या लंच के बाद?”

मशीनें भले ही तेज हों, लेकिन भारतीय सरकारी कार्यसंस्कृति सीखने में उन्हें थोड़ा वक्त तो लगेगा!

डेटा बना राष्ट्रीय संपत्ति, अब पेन ड्राइव कौन ढूंढेगा?

सरकारी डेटा को बेहतर तरीके से जोड़ने और अलग-अलग विभागों के डेटा सिस्टम में तालमेल बढ़ाने की जरूरत भी सामने आई। व्यंग्यात्मक तौर पर देखें तो सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि एक विभाग का डेटा दूसरे विभाग के कंप्यूटर को समझ आए।

वरना एक्सेल की अलग-अलग फाइलें देखकर सिस्टम भी शायद पूछ बैठे—“सर, अंतिम फाइल कौन-सी है?”

पोर्ट-लेड डेवलपमेंट से ‘टेबल-लेड’ फाइलों तक

बैठक में रक्षा क्षेत्र, रिसर्च, जहाज निर्माण और पोर्ट-लेड डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अब अगर इसी ‘मिशन मोड’ को सरकारी दफ्तरों की फाइलों पर लागू कर दिया जाए, तो शायद फाइलें भी बंदरगाह की तरह अपनी मंजिल तक पहुंचने लगें।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि साइलो सच में टूटेंगे या सिर्फ उनके बाहर नया बोर्ड लगा दिया जाएगा?

क्योंकि अगर विभाग जुड़ गए, AI सही तरीके से इस्तेमाल होने लगा और युवा वास्तव में नीति निर्माण में शामिल हो गए, तो यह बदलाव सिर्फ सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कम से कम अगली बैठक का एजेंडा तो जरूर तैयार रहेगा - “साइलो तोड़ने की प्रगति की समीक्षा।”