चुनावी-चोंचले

चुनावी भविष्यवाणी या सियासी भौकाल? अमित शाह के 30 साल वाले बयान पर चुटकी

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भविष्यवक्ताओं की चांदी है। एक तरफ गृह मंत्री अमित शाह जी ने ऐसा ज्योतिषीय ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस मुख्यालय में रखे हुए सारे कैलेंडर अब...

चुनावी भविष्यवाणी या सियासी भौकाल? अमित शाह के 30 साल वाले बयान पर चुटकी

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भविष्यवक्ताओं की चांदी है। एक तरफ गृह मंत्री अमित शाह जी ने ऐसा ज्योतिषीय ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस मुख्यालय में रखे हुए सारे कैलेंडर अब सीधे साल 2056 के बाद ही अपडेट होंगे! शाह साहब ने बड़े प्यार से राहुल गांधी जी को संदेश भेजा है कि भाई, जब भी विदेश यात्रा से फुर्सत मिले, तो हमारा यह भाषण सुनकर रख लेना - "अगले 30 साल तक आपका नंबर नहीं लगने वाला!"

अब इस भविष्यवाणी पर राहुल गांधी जी के समर्थक थोड़े असमंजस में हैं कि वे इस पर रोएं या ट्रेवल एजेंट को फोन करके अगले तीन दशकों की और लंबी टिकटें बुक करा लें। वैसे भी, राहुल जी का विदेश प्रेम ऐसा है कि जैसे ही देश में कोई गंभीर राजनीतिक मुद्दा गरमाता है, वे तुरंत अपना जीपीएस ऑन करके किसी अज्ञात और शांत विदेशी लोकेशन पर प्रकट हो जाते हैं। लगता है वे भगवान से सीधे '30 साल की एंटी-एजिंग' और 'सत्ता प्राप्ति का मुहूर्त' डाउनलोड करके ही लौटेंगे!

उधर, SIR (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) और वोट चोरी के आरोपों पर भी गजब का दंगल चल रहा है। कांग्रेस का तर्क है कि जब हम हारते हैं, तो मशीनें और सूचियां खराब होती हैं; और जब जीतते हैं, तो लोकतंत्र बहुत मजबूत होता है। यानी चुनाव आयोग एक ऐसा वेदर-वैन (मौसम बताने वाला यंत्र) बन गया है, जो कांग्रेस की जीत पर ठंडी और हार पर एकदम गर्म हवा फेंकता है! अमित शाह जी ने भी तंज कसते हुए तड़का लगा दिया कि “प्रदर्शन करने से चुनाव नहीं जीते जाते, जनता के बीच जाना पड़ता है।” बात तो सोलह आने सच है, क्योंकि दिल्ली के स्टूडियो में बैठकर रील्स बनाने और विदेश की वादियों से 'ट्वीट बम' फोड़ने से जनता का राशन कार्ड तो नहीं बनता!

व्यंग्य का मर्म यह है कि हमारे देश में विपक्ष की योजना हमेशा 'अगले चुनाव में चमत्कार' की होती है, और सत्ता पक्ष की योजना 'अगले 30 साल तक सिंहासन पर कब्जा' पक्का करने की होती है। जनता बेचारी बीच में खड़ी होकर सोचती है कि हम इन दोनों के आपसी वार-पलटवार के बीच अपना बिजली का बिल भरें या इस बात की रिसर्च करें कि 30 साल बाद जब अगली सरकार आएगी, तब तक हमारी मेट्रो का टिकट कितना महंगा हो चुका होगा!

फिलहाल, शाह जी ने 30 साल का जो 'टर्म इंश्योरेंस' बीजेपी के लिए मांग लिया है, उसने कांग्रेस को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भाई - कम से कम कोई ऐसा कोर्स तो होना चाहिए जो 30 साल के राजनीतिक वनवास को शॉर्टकट में 5 साल में बदल सके! तब तक, देश की जनता पॉपकॉर्न लेकर इस बात का आनंद ले रही है कि राजनीति में भविष्यवाणी करना और उस पर ताली बजाना ही सबसे बड़ा मनोरंजन बन चुका है।