बाउंड्री-पार

गेंद तुम्हारी, कहानी हमारी!

केप वर्डे ने स्पेन को 0-0 पर रोककर इतिहास रचा। 74% बॉल पजेशन रखने वाले स्पेनिश स्टार्स 40 साल के गोलकीपर वोजिन्हा के हौसले के आगे पस्त हो गए। आंकड़ों की जीत हुई, पर दिल केप वर्डे ने जीता।

गेंद तुम्हारी, कहानी हमारी!

फुटबॉल में एक पुरानी कहावत है कि गेंद जितनी देर आपके पास रहे, जीत उतनी आसान हो जाती है। लेकिन केप वर्डे ने स्पेन के खिलाफ यह साबित कर दिया कि कभी-कभी गेंद नहीं, बल्कि हौसला मैच जीतता है।

स्पेन वाले बेचारे पूरे मैच में गेंद लेकर ऐसे घूमते रहे, जैसे कोई अमीर आदमी शादी में सोने की चेन पहनकर अपनी हैसियत दिखाता है। गेंद उनके पैरों में थी, पास उनके थे, आंकड़े उनके थे, लेकिन स्कोरबोर्ड किसी की जागीर नहीं होता। वह तो बस गोल गिनता है, और गोल हुए ही नहीं।

उधर, केप वर्डे की आबादी महज साढ़े पांच लाख। भारत के किसी छोटे शहर से भी कम। स्पेन में रजिस्टर्ड फुटबॉलरों की संख्या ही दस लाख से ज्यादा है। मतलब, स्पेन के पास खिलाड़ी इतने हैं कि केप वर्डे की पूरी आबादी से मुकाबला कर लें। लेकिन मैदान में पता चला कि फुटबॉल खिलाड़ियों की गिनती से नहीं, दिल की धड़कनों से खेली जाती है।

केप वर्डे के खिलाड़ी गेंद मिलते ही ऐसे भागते थे जैसे राशन की दुकान पर आखिरी दिन चीनी बंट रही हो। और गेंद छिनते ही पूरा दल रक्षा पंक्ति में इस तरह लौट आता, जैसे भारतीय परिवार में कोई मेहमान अचानक आ जाए और सब लोग अपने-अपने काम में लग जाएं।

स्पेन के सितारे एक-एक करके हमले करते रहे। कभी दाएं से, कभी बाएं से। लेकिन सामने थे 40 साल के गोलकीपर वोजिन्हा। उम्र के उस पड़ाव पर, जहां लोग घुटनों के दर्द की दवा ढूंढते हैं, वोजिन्हा दुनिया के सबसे बड़े मंच पर हवा में उड़ रहे थे। उन्होंने ऐसे बचाव किए कि स्पेनिश खिलाड़ी भी सोचने लगे होंगे कि आखिर यह आदमी गोलपोस्ट की रखवाली कर रहा है या अपने घर की इज्जत की।

यह मैच सिर्फ फुटबॉल नहीं था, यह दुनिया की उस सच्चाई का आईना भी था, जहां बड़े देश अक्सर मान लेते हैं कि ताकत, पैसा और संसाधन ही सब कुछ हैं। लेकिन इतिहास बार-बार बताता है कि छोटे देश, छोटे लोग और छोटे सपने भी बड़े-बड़ों की नींद उड़ा सकते हैं।

स्पेन गेंद घर ले जाए, आंकड़े घर ले जाए, 74 प्रतिशत पजेशन भी घर ले जाए। केप वर्डे तो वह चीज लेकर गया है, जो हर किसी के नसीब में नहीं होती-सम्मान।

और हां, जोस मोरिन्हो अगर यह मैच देख रहे होंगे, तो मुस्कुरा रहे होंगे। आखिर उनकी बात एक बार फिर सच साबित हुई:

"गेंद तुम अपने घर ले जाओ, हम तो अपनी कहानी लेकर जा रहे हैं।"